जादुई आइना – Top 3 Fairy tales in hindi story

Fairy tales in hindi : यहाँ मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ  Fairy tales in hindi जो वास्तव में अद्भुत और प्रेरणा दायी साबित होगी  Fairy tales in hindi आपको बहुत सी चीजें सिखाएगा और आपको एक शानदार अनुभव प्रदान करेगा। आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ यह साझा कर सकते हैं और ये Moral stories आपके बच्चों या छोटे भाई-बहनों के लिए बहुत उपयोगी होंगी।

Fairy tales in hindi

Contents

जादुई आइना 

गांव में सुरेश नाम का एक व्यक्ति रहता था वह एक व्यापारी था उसकी नगर में 1 फलों की दुकान थी उसका व्यापार अच्छा चल रहा था उसका घर भी बहुत ही सुंदर था उसकी एक पत्नी थी  और उसका एक बेटा भी था वह पढ़ाई लिखाई में बहुत ही होशियार था सुरेश एक अनुशासित व्यक्ति था वह अनुशासन का पालन करने में यकीन रखता था वह अपने बेटे और पत्नी को भी तथा उसका बेटा तो उसकी हर बात मानता था पर सुरेश की पत्नी उसकी कोई बात नहीं सुनती थी वह काफी चक्की स्वभाव की स्त्री थी

वह अपने पति पर शक करती रहती थी उसके विपरीत सुरेश दीपिका से बहुत ही प्रेम करता था वह उसकी हर बात मानता था वह जो भी मानती सुरेश उसे लाकर देता था दीपिका को सजना सवरना बहुत ही पसंद था दीपिका की एक बचपन की सहेली थी जो उसे हर छह-सात महीनों में एक बार उससे मिलने आया करती थी |

कुछ दिनों बाद दीपिका की सहेली उसके पास आई जिसे देखकर दीपिका बहुत ही खुश हो गई अच्छा हुआ कमला तुम आ गई जब भी तुम आती हो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है नहीं तो मैं हमेशा दुखी ही रहती हूं क्यों क्या हुआ दीपिका तुम्हें कोई परेशान करता है क्या नहीं कमला मुझे ऐसा लगता है कि मेरे पति की कोई दूसरी दोस्त भी है इसीलिए वह मुझसे कुछ ज्यादा बात नहीं करते |

कमला मुझे सच में लगता है वह घर में भी बहुत देर से आते हैं चलो फिर मैं तुम्हें एक साधु के पास लेकर चलती हूं वह तुम्हारी कोई ना कोई मदद जरूर करेंगे तब कमला दीपिका को एक साधु के पास लेकर गई और वहां पहुंचकर दीपिका ने साधु से कहा प्रणाम साधु बाबा मुझे लगता है कि मेरे पति मुझसे कुछ छुपा रहे हैं मैं चाहती हूं आप मुझे कोई ऐसी चीज दो ताकि मैं उससे उनका भविष्य जान सकूं तब साधु ने उससे कहा मैं तुम्हारी सारी बात समझ गया पर तुम जो मांग रही हूं वह सही नहीं है |

इसके बाद में तुम्हें ही दुख होगा नहीं साधु बाबा मैं अपना शक दूर करना चाहती हूं चलो ठीक है मैं तुम्हारी मदद कर देता हूं मैं तुम्हें एक जादुई आईना दे रहा हूं तुम इससे किसी का भी भविष्य देख सकती हो पर यह आइना तुम्हारी सोच के अनुसार ही तुम्हें भविष्य दिखाएगा तुम जैसा भी किसी के बारे में सोचो कि यह आइना वैसा ही दिखाएगा और जो भी इसमें तुम्हें दिखेगा वह भविष्य में जरूर होगा |

अब यह तुम्हारे पर निर्भर करता है कि तुम उसके बारे में क्या सोचती हो ठीक है साधु बाबा मैं सारी बात समझ गई तब दीपिका उस आईने को लेकर घर आ गई और उस आईने से कहा मुझे मेरे पति का भविष्य बता तब उस जादुई शीशे ने दीपिका के सोच के अनुसार उसे भविष्य दिखाया शीशे में सुरेश किसी लड़की के साथ था और वह हंसकर एक-दूसरे से बातचीत कर रहे थे यह देखकर उसका शक यकीन में बदल गया |

अब वह सुरेश से बातचीत नहीं करती थी सुरेश ने उसे बहुत बार पूछा तुम्हें क्या हुआ है तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो पर दीपिका ने उसका कोई जवाब नहीं दिया और अगले दिन वह अपने घर चली गई यह सब देखकर सुरेश बहुत ही उदास हो गया 2 दिन बीत गए थे पर दीपिका सुरेश के पास वापस नहीं गई दीपिका के माता-पिता ने भी उससे पूछा पर दीपिका ने कुछ ना बोला अगले दिन वही लड़की दीपिका के आगे से गुजरी जिसे दीपिका ने शीशे में सुरेश के साथ देखा था |

दीपिका उसका पीछा करने लगी वह लड़की सुरेश के घर ही जा रही थी दीपिका भी उसका पीछा करते-करते सुरेश के घर तक पहुंच गई और एक जगह पर छुप गई असल में वह लड़की सुरेश की मौसी की बेटी थी जो अपने भाई से मिलने आई थी तब सुरेश और उसकी मौसी की लड़की की  सारी बातचीत दीपिका छुपकर सुन रही थी जब दीपिका को पता चला यह लड़की उसकी बहन है |

वह बहुत ही दुखी हो गयी और अपने आप  पर गुस्सा आ रहा था और शर्म भी पर किसी भी तरह हिम्मत करके वह सुरेश के पास गई और कहा मुझे माफ कर दीजिए मैंने आप पर गलत ही शक किया आप तो देवता के समान हैं और उसने उसे सारी बात बता दी यह सब सुनकर सुरेश को बहुत गुस्सा आया और उसने उसी समय दीपिका को माफ भी कर दिया और वे आपस में खुशी-खुशी रहने लगे |

 

शिक्षा शक करना अच्छी बात नहीं है हमेशा एक दूसरे के साथ प्रेम से रहें |

साधु बावा का वरदान 

बहोत समय के पहले की बात है एक जंगल में एक साधु रहता था उसके पास  एक जादुई पेंसिल थी जादुई पेंसिल पर चढ़कर साधु आसमान में उड़ता था एक बार साधु जादुई पेंसिल की मदद से कहीं उड़ कर जा रहा था कि अचानक उसके सामने एक पक्षी आ गया जिसकी वजह से उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे जमीन पर जा गिरा उसे काफी चोटें आ गई थी और काफी खून भी निकल रहा था

उसी समय बल्लू नाम का व्यक्ति वहा से  गुजर रहा था उसने साधु को उठाया और घर में ले जाकर उसका इलाज किया बल्लू ने साधु से पूछा साधु महाराज आपको ये  चोट  कैसे लगी तब साधु ने उसे सारी बात बता दी फिर उसे बल्लू ने कई दिनों तक साधु की सेवा की जब साधु पूरी तरह से ठीक हो गया तब  उस साधु ने कहा बेटा तुमने मेरी बहुत सेवा की है मैं तुमसे बहुत ही प्रसन्न हूं परंतु अब मेरे जाने का समय आ गया है जाने से पहले मैं तुम्हें कुछ देना चाहता हूं बताओ तुम्हें क्या चाहिए बल्लू ने बोला साधु महाराज में जादुई पेंसिल लेना चाहता हूं ताकि मैं भी हवा में उड़ सकू फिर साधु बोला ठीक है मैं तुम्हें जादुई पेंसिल दे दूंगा मेरे पास ऐसी एक और भी पड़ी है परंतु तुम इसका प्रयोग दूसरों की भलाई के लिए करना फिर बल्लू को जादुई पेंसिल दे दी और बल्लू से कहा मैंने यह जादुई पेंसिल तुम्हें इसलिए दी  है क्योंकि तुम बहुत ही नेक हो पर याद रखना लालच में आकर कोई गलत काम मत करना ठीक है साधु बाबा मैं इस पेंसिल से लोगों की मदद ही करूंगा |

फिर साधु दूसरी पेंसिल पर चढ़कर वहां से चला जाता है जादुई पेंसिल को पाकर बल्लू बहुत ही खुश हो जाता है बल्लू पेंसिल की मदद से हवा में उड़ कर दूर-दूर तक घूमता रहता है बल्लू ने सारे गांव को उस जादुई पेंसिल के बारे में बताया और बल्लू गांव वालों को भी पेंसिल से हवाई सर करवाता था इसी तरह वह सारे गांव में मशहूर हो गया था |

1 दिन बल्लू जादुई पेंसिल पर सवार होकर बहुत ही दूर एक जंगल तक पहुंच गया था वापिस आते आते बहुत रात हो गई थी वापस आते समय उसने जंगल में एक चमकते हुए खजाने को देखा फिर उसने सोचा मैं खजाने को लेने के लिए नीचे उतरा परंतु तभी वहां पर एक भूत और एक चुड़ैल आ गई उन्हें देखकर बल्लू बहुत ही डर गया तब चुड़ैल ने बल्लू से पूछा अरे इंसान तो आसमान में कैसे उड़ता है तब बल्लू ने पेंसिल के बारे में बताया |

भूत बल्लू को खाने के लिए उसकी और आगे बढ़ा परंतु चुड़ैल ने उसे रोका और कहा हम इसका फायदा उठा सकते हैं तब चुड़ैल ने बल्लू से कहा इंसान मिला है कि हम इस जंगल से बाहर नहीं जा सकते और कोई भी इंसान इस जंगल में नहीं आता इसीलिए हम बहुत भूखे हैं अगर तुम हमारे खाने के लिए इंसानों को यहां ला सकते हो तो हम तुम्हें खजाना दे सकते हैं बल्लू चुड़ैल की बातों में आ गया और उसने सोचा कि साधु को थोड़ी ना पता चलेगा कि मैं यहां क्या कर रहा हूं मुझे बहुत सारा खजाना मिल जाएगा मैं इसकी बात मान ही जाता हूं फिर उसने चुड़ैल से कहा हां हां मुझे मंजूर है |

तब बल्लू वहां से उठकर घर की ओर चला गया एक जगह पर एक व्यक्ति को देखा इससे जादुई पेंसिल पर बैठा कर जंगल में ले जाता हूं बल्लू उसके पास गया और बोला अरे मोहन क्या तुम हवाई सैर करना चाहते हो तब मोहन ने हां कर दी बल्लू उसे जादुई पेंसिल पर चढ़ा कर हवा में उड़ने लगा |

बल्लू से जंगल में ले गया और बल्लू ने उसे जमीन पर उतार दिया तभी भूत और चुड़ैल वहां आ गए और उन्होंने बल्लू को एक सोने का सिक्का दिया और उस मोहन को मारकर खा लिया बल्लू ने अपने मन में सोचा अरे वाह इस तरह तुम्हें बहुत ही जल्दी अमीर हो जाऊंगा अब बल्लू गांव वालों को पेंसिल की सवारी कराने के बहाने जंगल में ले जाता और भूत और चुड़ैल उन्हें खा लेते और इसके बदले में हर बार एक सोने का सिक्का दे दिया करते थे उसने बहुत से सिक्के जमा कर लिए दूसरी और गांव वाले हैरान हो रहे थे कि अचानक गांव वाले गायब क्यों हो रहे हैं |

1 दिन जब साधु उस गांव से गुजर रहा था तो उसने लोगों की भीड़ को देखा साधु उनके पास गया और कहा है गांव वालों आप यहां खड़े क्यों हो तब गांव वालों ने उन्हें सारी बात बताई कि गांव वाले रहस्यमय ढंग से गायब हो रहे हैं कुछ देर बाद साधु कहीं से जा रहा था तभी उसने बल्लू को एक लड़की के साथ जादुई पेंसिल पर उड़ते देखा अगले दिन साधु को पता चला कि वह लड़की कल शाम से घर वापस नहीं आई है साधु को बल्लू पर शक हो गया जब वल्लू एक और व्यक्ति को लेकर उड़ रहा था तब साधु ने भी जादुई पेंसिल निकाली और उसका पीछा करने लगा साधु बल्लू का पीछा करते हुए जंगल में पहुंच गया और बल्लू से कहा तुमने अच्छा नहीं किया बल्लू अपने लालच के कारण मासूम गांव वालों की जान लेते हो तब बल्लू ने चुड़ैल और भूत को जादुई पेंसिल पर बिठाया और वहां से दूर उड़ने लगा साधु भी जादुई पेंसिल पर बैठकर उनका पीछा करने लगा तब साधु ने अपनी शक्ति से बल्लू पर हमला किया जिससे बल्लू चुड़ैल और भूत नीचे नदी में गिर गए और उसी नदी में डूब गए इस तरह उन्हें अपनी गलती की सजा मिल गई |

 

शिक्षा लालच बुरी बला है |

बुरी संगत 

एक जंगल में शेरो का एक परिवार रहता था शेर के बच्चे बहुत ही अच्छे और सफेद थे अपने बच्चों को यह सिखाने के लिए की क्या  गलत है और क्या सही है शेरनी को बहुत कष्ट उठाना पड़ा था शेर और शेरनी  की परिवार की पास ही  इधर और गीदड़ ने अपने बच्चों के साथ पडोसी की समान रहते थे गीदड़ के बच्चे बहुत ही जंगली और असभ्य ढंग से खेलते थे शेर और उसकी पत्नी शेरनी ने अपने बच्चों को उनके साथ खेलने को मना कर रखा था परंतु गीदड़ के बच्चे शेर के  मां के पास जाकर बच्चों से मित्रता करना चाहते थे पर शेरनी अपने बच्चों को सदा उनसे दूर रखती थी |
और गिधड  के बच्चों को वहां से हटा देती थी शेर के बच्चों ने अपनी माँ  शेरनी से पूछा मां गीदड़ के बच्चों के साथ क्यों नहीं खेल सकती शेरनी  ने अपने बच्चों को समझाते हुए  कहां मैं तुमको  सदा बुरी संगति से दूर रखना चाहती हूं नहीं तो तुम लोग को कोई पसंद नहीं करेगा अगर तुम उनके साथ खेलोगे तो तुम भी उनके समान दुष्ट हो जाओगे कोई भी तुम लोगों को पसंद नहीं करेगा नहीं तुम्हारे साथ खेलेगा एक दिन शेरनी ने  सोचा की बच्चों को शेरों के समान दहाड़ना  चाहिए हमारे बचे तो आपस में खेलते हैं एक दूसरे की गलती पर हंसते भी हैं इधर गीदड़ के बच्चों ने देखा इनके बच्चे दहाड़ एनीमी अच्छा उन्होंने भी शेर के बच्चों के समान दहाड़ना चाहा पर  के ही समान चिल्लाकर घर आने लगे शेर के बच्चे भी क्यों कुछ देखकर और उनका चिल्लाना सुनकर हंसी हंसी में उनके समान गीदड़ की आवाज में चिल्ला कर  गहराने की कोशिश करने लगे इस  प्रकार शेर के बच्चे गिध्द की नकल करने लगे मां शेरनी  सोचा वह अपने बच्चों को को  कैसे रोके |
वह उन को समझाते हुए कहने लगी कोई तुम्हें ऐसा करती सुनेगा तो कहेगा की तुम दूसरों की आवाज की नकल कर सकती हो तो तुम दूसरों की बुरी आदतों की भी नकल करोगे तुम नही चाहिए कि पड़ोसियों की यदि बुरी आदतें हैं तो उनकी बुरी संगत से दूर रहो
सदा अच्छी संगत करो क्योंकि बुरी मित्र बुरी संगत में डालकर परेशानी में फंसा देते हैं इस प्रकार ढेरों शत्रु बन जाते हैं |

Conclusion

तो दोस्तों ये थी  Fairy tales in hindi story के बारे में पूरी जानकारी  दोस्तों आपको कैसी लगी, अगर आपको पसंद आयी हो तो  दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना ना भूलें और अगर आपका कोई सवाल है  तो हमें कमेंट करके बता सकते हे |

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